राष्ट्रीय
पाकिस्‍तान के लिए आत्‍मघाती साबित होगा जाधव मामले में उठाया कोई भी गलत कदम
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कुलभूषण जाधव मामले में आईसीजे के फैसले के बाद पाकिस्‍तान के पाले में गेंद है। इस पर उसको ही फैसला लेना है। लेकिन यह तय है कि कोई भी गलत फैसला उसके लिए आत्‍मघाती साबित होगा

हाफिज सईद को वैश्विक आतंकी घोषित करने और भारत को मिली कामयाबी को अभी पाकिस्‍तान सही से पचा भी नहीं पाया था कि कुलभूषण जाधव मामले में भी उसको नाकामी का मुंह देखना पड़ा है। अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट (International Court of Justice) ने 17 जुलाई 2019 को अपने फैसले में माना कि पाकिस्‍तान ने कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्‍सेस न देकर वियना संधि का उल्‍लंघन किया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जाधव को न सिर्फ काउंसलर एक्‍सेस दिया जाए बल्कि उनको दी गई फांसी की सजा पर भी पुनर्विचार किया जाए। आपको यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि इस मामले की पैरवी के दौरान पाकिस्‍तान ने कोर्ट में दलील दी थी कि दोनों देशों के बीच 2008 में द्विपक्षीय समझौता हुआ था जिसमें कहा गया था कि जासूसी के किसी मामले में काउंसलर एक्‍सेस की सुविधा मुहैया करवाना एक अपवाद ही होगा। लेकिन, कोर्ट ने माना कि यह समझौता वियना संधि से बड़ा नहीं हो सकता है लिहाजा ये इसका केवल पूरक ही हो सकता है। जाधव मामले में आए अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के फैसले को दोनों देश अपनी जीत बता रहे हैं। पाकिस्‍तान का कहना है कि कोर्ट ने अपने फैसले में यह नहीं कहा है कि पाकिस्‍तान में जाधव को दी गई सजा को किस तरह से रिव्‍यू किया जाए। हालांकि कोर्ट ने इतना जरूर कहा है कि पाकिस्‍तान के कानून के मुताबिक ही यह होना चाहिए। पाकिस्‍तान की मीडिया में भी इस फैसले के काफी चर्चे सुनाई दे रहे हैं। पाकिस्‍तान के जाने-माने अखबार द डॉन के संपादकीय में कहा गया है कि दोनों देशों को एक बार फिर से मेज पर आकर जासूसी के मामले में काउंसलर एक्‍सेस को लेकर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। संपादकीय में यह भी कहा गया है कि दोनों ही देशों को मनमुटाव दूर कर जल्‍द से जल्‍द वार्ता के लिए मेज पर आना चाहिए। आपको यहां पर ये भी बता दें कि अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के फैसले को मानने के लिए कोई भी देश बाधित नहीं होता है। दूसरी तरफ भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि पाकिस्‍तान को कोर्ट का फैसला मानना ही होगा। बहरहाल, विदेश मामलों के जानकार ऑब्‍जरवर रिसर्च फाउंडेशन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत का कहना है कि अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद अब गेंद पाकिस्‍तान के पाले में है। उसको तय करना है कि अब वह क्‍या करे। उनका कहना है कि पाकिस्‍तान इस वक्‍त बेहद दबाव में है। इस दबाव की वजह से ही उसको भारत की कई मांगों को मानना पड़ा है। इसमें करतारपुर कॉरिडोर के साथ-साथ जीरो लाइन पर ब्रिज का निर्माण, हर रोज 5000 श्रद्धालुओं के लिए वीजा फ्री एंट्री की मांग भी शामिल है। इतना ही नहीं भारत के दबाव में ही आकर उसको अपना एयरस्‍पेस दोबारा भारतीय विमानों के लिए खोलना पड़ा है। आपको बता दें कि पाकिस्‍तान के मंत्री का कहना है कि एयरस्‍पेस को बंद कर पाकिस्‍तान को 8 बिलियन रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। गौरतलब है कि पाकिस्‍तान ने फरवरी में बालाकोर्ट एयर स्‍ट्राइक के बाद से ही विमानों के लिए अपना एयरस्‍पेस बंद कर दिया था।

प्रोफेसर पंत का कहना है कि हाफिज सईद की गिरफ्तारी और उस पर आतंकी गतिविधियों से जुड़ने के 23 मामले भी भारतीय दबाव का ही नतीजा हैं। उनके मुताबिक पाकिस्‍तान इस बात को बेहतर तरीके से जानता है कि आईसीजे ने कुलभूषण जाधव मामले में जिस तरह से भारत का पक्ष लिया वह उसके लिए सही नहीं है। ऐसे में उसका कोई भी गलत कदम उसको वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर सकता है। पाकिस्‍तान आईसीजे की उस टिप्‍पणी से भी दुखी है जिसमें कोर्ट ने माना कि जाधव मामले में पाकिस्‍तान ने न्‍यूनतम कानूनी प्रावधान भी नहीं माने। इस वजह से भी वैश्विक मंच पर उसकी कलई खुल गई है। इस मामले में सिर्फ एडहॉक जज जस्टिस जिलानी के ही बयान अलग थे। अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट में पाकिस्‍तान के एडहॉक जज तसद्दुक हुसैन जिलानी