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सावन के दूसरे दिन भी दिल्ली-NCR में हुई झमाझम बारिश
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इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार और बुधवार को भी बारिश के बाद पारा गिरने से मौसम खुशनुमा रहा।

राजधानी में गुरुवार सुबह भी रूक-रूककर हुई बारिश ने मौसम खुशगवार बना दिया। बारिश की वजह से मौसम के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इस दौरान सुबह ऑफिस जाने वाले कुछ लोगों को थोड़ी बहुत परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। बारिश के बाद हुए जलभराव से सड़कों पर यातायात जाम हुआ। जिससे लोगों को परेशानी हुई। इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार और बुधवार को भी बारिश के बाद पारा गिरने से मौसम खुशनुमा रहा। बुधवार को बारिश के बाद दिन का अधिकतम तापमान 31.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जो कि सामान्य से तीन डिग्री कम है। जबकि, न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस रहा जो कि सामान्य से वो भी तीन डिग्री सेल्सियस कम है।

जुलाई के पहले पखवारे में झमाझम बारिश के बाद मानसून थोड़ा कमजोर पड़ गया है, लेकिन बढ़ी गर्मी के कारण फिर तेजी से बादल बन रहे हैं। इन्हीं वजहों से गुरुवार और शुक्रवार को बारिश के आसार हैं। हालांकि मानसून की झमाझम बारिश 21 जुलाई से हो सकती है। गौरतलब है कि पिछले पांच दिनों से लगातार चढ़ रहे पारे की वजह से लोग फिर से बारिश के इंतजार में हैं। मौसमविदों का कहना है कि तेज धूप की वजह से लोकल हीटिंग हो रही, जो अलग-अलग इलाकों में बारिश की वजह बन सकती है। पटना में भी इन्हीं वजहों से गुरुवार और शुक्रवार को बारिश के आसार हैं। वहीं, मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो 21 और 22 जुलाई तक मानसून फिर से बिहार के कई इलाकों में सक्रिय हो सकता है। अभी मानसून की ट्रॉफ लाइन बिहार से होकर गुजर रही है, लेकिन कोई ऐसा सिस्टम नहीं बन रहा है, जो मानसून ट्रॉफ को तेजी से सक्रिय करे। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की ओर चक्रवाती हवा का क्षेत्र तो बना है, लेकिन वह ओडिशा के तटवर्तीय इलाके को विशेष प्रभावित कर रहा है। मौसमविदों का पूर्वानुमान है कि 21 जुलाई तक मानसून फिर से बिहार में मजबूत होगा और बारिश की स्थिति बन सकती है।

उत्तराखंड में मानसून आने के बाद भी पानी उतना नहीं बरसा, जितना राज्य को खुशहाल करने के लिए चाहिए। 24 जून से मानसून की आमद हुई, जो माह के अंत तक कमजोर रहा। इसके बाद जुलाई में मानसून ने रफ्तार पकड़ी तो अब 18 जुलाई से फिर मानसून कमजोर होने जा रहा है। प्रदेश में अब तक मानसून 163 एमएम ही बरसा है। जबकि सामान्य तौर पर 290.7 एमएम बारिश होनी चाहिए थी। इस बार अभी तक मानसून माइनस 44 प्रतिशत पीछे चल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पर्वतीय जिलों में अभी तक भारी बारिश नहीं हुई है। जो भारी बारिश हुई है, वो मैदानी जिलों और उससे लगते पर्वतीय जिलों (टिहरी, पौड़ी और नैनीताल) में हुई है। हालांकि यहां का औसत भी पिछले सालों के मुकाबले कम है।