राष्ट्रीय
समाचार ब्यूरो
राफेल सौदा: प्रशांत भूषण और अन्य याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में रखा लिखित पक्ष
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सुनवाई में केंद्र सरकार ने न्यायालय से कहा था कि उसने राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के मामले में कोई गलत जानकारी अदालत को नहीं दी है।

राफेल सौदे की पुनर्विचार याचिका पर उच्चतम न्यायालय सुनवाई कर रहा है। अदालत की पीठ के समक्ष आज याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण और अन्य ने लिखित में अपना पक्ष रखा है। इससे पहले अदालत में 10 मई को मामले की सुनवाई हुई थी। सुनवाई में केंद्र सरकार ने न्यायालय से कहा था कि उसने राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के मामले में कोई गलत जानकारी अदालत को नहीं दी है। सरकार ने अदालत में कहा था कि कुछ मीडिया रिपोर्ट और गैरकानूनी तरीके से हासिल अधूरी आतंरिक नोट के आधार पर पुनर्विचार याचिका दायर करने वालों ने परजूरी (शपथ लेकर गलत बयान देना) आवेदन दाखिल किया है, लिहाजा इसे खारिज किया जाना चाहिए।  वहीं, याचिकाकर्ताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर सीएजी की रिपोर्ट पर सवाल उठाया था। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली न्यायालय की पीठ इस मसले पर सुनवाई कर रही है। अदालत में हलफनामा दायर कर सरकार ने कहा था कि कानूनन, मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अदालत कोई निर्णय नहीं लेती।  सरकार ने कहा था, खरीद निर्णय लेने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है और कई जगहों या अधिकारियों से होकर गुजरती है। अपूर्ण आंतरिक रिपोर्ट के आधार पर परजूरी का आवेदन दाखिल नहीं किया जा सकता। मीडिया रिपोर्ट पूरे घटनाक्रम और प्रक्रिया की सही तस्वीर पेश नहीं करती, वह महज प्रक्रिया का एक हिस्सा है।   सरकार ने कहा है परजूरी आवेदन पूरी तरह से मिथ्या और आधारहीन तथ्यों पर आधारित है और इसके जरिए राफेल विमान के मामले को फिर से खोलने का प्रयास है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 14 दिसंबर को अपना फैसला देकर खत्म कर दिया था।